Janmashtami (जन्माष्टमी) 2019 date in India Panchang के अनुसार

Janmashtami (जन्माष्टमी)2019 date in india

Janmashtami 2019 date in india

इस साल 2019 में जन्माष्टमी (Janmashtami) 23 अगस्त 2019 को मनाई जा रही है.

मान्‍यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्‍ण का जन्‍म भाद्रपद यानी कि भादो माह की कृष्‍ण पक्ष की अष्‍टमी को हुआ था, जो कि इस बार 23 अगस्त को पड़ रही है। इस वजह से जन्माष्टमी 23 अगस्त को ही मनाया जाएगा।

 ज्यादा लोग 23 अगस्त को ही श्री कृष्ण जन्माष्टमी मनाएंगे । इसीलिए Janmashtami 2019 date in India is 23 August.  

इस दिन से जुड़ी एक कथा है आइये उसे सुनते है और अपने को कृतार्थ करते है प्रभु की भक्ति में ।

श्री कृष्णा जन्माष्टमी की कथा

हम सभी जन्माष्टमी के दिन अपने प्रभु भगवान श्री कृष्णा के धरती पे जन्म कि प्रतीक्षा में आस लगाए रहते है. लेकिन क्या आप सबको ये ज्ञात है के इस दिन श्री कृष्णा के जन्म की कथा सुनने कि विधान है.

और जो भक्तगण इस दिन प्रभु के जन्म की कथा सुनते है उनकी साड़ी बाधाएं स्वतः समाप्त हो जाती है और उनपे प्रभु श्री कृष्ण की असीम कृपा होती है. तो आइये हम सब उनकी कथा सुनते है जो समस्त पापो को हरने वाली है.

भगवान श्रीकृष्‍ण का जन्‍म भादो माह की कृष्‍ण अष्‍टमी को हुआ था. ऐसा जाना जाता है के उस दिन बहुत तेज़ आंधी तूफ़ान और बारिश हुई थी.

प्रभु कि जन्म भादो माह की रोहिणी नक्षत्र में हुआ था. माता देवकी ने अपने भाई कंस की काल कोठरी में आधी रात को गोपाल को जन्‍म दिया था.

द्वापर युग में भोजवंशी राजा उग्रसेन मथुरा में राज्य करते थे. कंस उन्ही का पुत्र था जिसने आगे चलकर अपने पिता को हटा स्वयं सिहांसन पे बैठा और मथुरा का राजा बना. वह था तो बाउट क्रूर और बलशाली किन्तु अपनी बहन देवकी को अत्यंत मानता था और उसने उसका विवाह वसुदेव नामक यदुवंशी सरदार से किया.

विवाह क उपरान्त कंस स्वयं अपनी बहन देवकी को उसके ससुराल छोड़ने जा रहा था के आकाशवाणी हुई के ‘हे कंस, जिस बहन देवकी को तू बड़े प्रेम से ले जा रहा है, उसी के गर्भ से एक पुत्र उत्पन्न होगा जो तेरा काल बनेगा’.

यह सुनते ही कंस अपने बहनोई वसुदेव को जान से मारने के लिए उठ खड़ा हुआ. तब देवकी ने उससे विनयपूर्वक कहा- हे भ्राता आप मेरे सुहाग का वध न करो, मेरे गर्भ से जो संतान होगी, उसे मैं तुम्हारे सामने ला दूंगी. बहनोई को मारने से क्या लाभ होगा.

कंस अपनी बहन की बात मान रुक गया और दोनों को पुनः मथुरा लाकर कारागृह में दाल दिया.कारागार में उन पर कड़े पहरे बैठा दिए गए.

एक एक कर उसने सारे नवजात को जन्म लेते ही मार डाला. लेकिन जब आठवाँ संतान होने वाला था उस दिवस को सारे सैनिक जो कारागृह की पहरेदारी कर रहे थे गहरी निद्रा में चले गए.

अचानक प्रकाश हुआ और उनके सामने शंख, चक्र, गदा, पद्म धारण किए चतुर्भुज भगवान श्री विष्णु प्रकट हुए. दोनों भगवान के चरणों में गिर पड़े.

तब प्रभु ने उनसे कहा- तुम मुझे इसी समय अपने मित्र नंद के घर वृंदावन में भेज आओ और उनके यहां जो कन्या जन्मी है उसे अपने साथ यहाँ ले आओ. यह कहकर प्रभु ने कहा अब मैं पुनः नवजात शिशु का रूप धारण कर लेता हूं.

उसके बाद वासुदेव की बेरियां खुल गयी और कारागृह की ताले भी स्वतः खुल गए. वासुदेव ने अपने उस आठवे संतान को लेकर वृन्दावन जाने का निश्चय किआ जहां उनके अभिन्न मित्र नंद की पत्नी यशोदा को भी बच्चा होने वाला था.

Janmashtami 2019 date in india

वसुदेव नवजात शिशु-रूप श्रीकृष्ण को सूप में रखकर कारागृह से निकल पड़े और भादो माह के अत्यंत तेज़ वर्षा और अथाह यमुना को पार कर नंद के घर पहुंचे.

वहाँ पहुँच उन्होंने नंदजी को सारी बातें बताई और पुत्री को ले जाने की अनुमति मांगी. नंदजी ने तुरंत अपने मित्र वासुदेव को लाकर अपनी पुत्री सौंप दी और वासुदेव वहाँ से वापिस मथुरा कारागृह में आ गए और सबकुछ यथावत पहले की तरह हो गया जैसे कोई कही गया ही न था.

अपने सैनिको से नवजात की सुचना मिलते ही कंस ने बंदीगृह जाकर देवकी के हाथ से नवजात कन्या को छीनकर पृथ्वी पर पटक देना चाहा, लेकिन वह कन्या आकाश में उड़ गई और वहां से कहा- ‘अरे मूर्ख, मुझे मारने से क्या होगा?

तुझे मारनेवाला तो वृंदावन में जा पहुंचा है. जो जल्द ही तुझे तेरे पापों का दंड देगा. कहकर वह अंतर्ध्यान हो गई.

मृत्‍यु की बात से विचलित कंस ने पूतना को बुलाकर उसे कृष्‍ण को मारने का आदेश दिया.
एक अत्यंत सुंदर स्त्री का रूप धारण का पूतना वृन्दावन जा पहुंची. मौका देखकर कृष्ण को उठा लिया और अपना दूध पिलाने लगी. स्तनपान करते हुए कृष्ण ने उसके प्राण हर लिए.

पूतना की मृत्यु की सुचना मिलते ही कंस ने केशी नामक अश्व दैत्य को कृष्ण को मारने के लिये भेजा. परन्तु प्रभु ने उसे भी यमलोक पहुंचा दिया. कंस ने फिर अरिष्ट नामक दैत्य को बैल के रूप में भेजा. अपने बाल रूप में क्रीडा कर रहे कृष्ण ने खेल-खेल में ही उस दैत्य रूपी बैल के सीगों को क्षण भर में तोड़ कर उसे मार डाला.

कंस फिर भी ना माना और उसने काल नामक दैत्य को कौवे के रूप में भेजा. वह जैसे ही कृष्‍ण को मारने के लिए उनके पास पहुंचा. श्रीकृष्ण ने कौवे को पकड़कर उसके गले को दबोचकर मसल दिया और उसके पंखों को अपने हाथों से उखाड़ दिया जिससे काल नामक असुर मारा गया.

खेलते खेलते एक दिन श्री कृष्ण की गेंद नदी में जा गिरी और वे गेंद लाने के लिए नदी में कूद पड़े. वहाँ कालिया नाग का वास था. खबर सुनते ही माता यशोदा और सारे गाँव वाले यमुना नदी के तट पर जा पहुंचे और कृष्णा कृष्णा आवाज लगाने लगे. थोड़ी ही देर में प्रभु श्री कृष्णा अपनी बांसुरी की मीठी धुन बजाते हुए कालिया नाग के ऊपर खरे प्रकट हुए. श्री कृष्ण की बात मान कालिया नाग अपने सभी बंधुओ के साथ वहाँ से चला गया.और इस तरह प्रभु ने यमुना नदी के पानी को फिर से पिने योग्य बना दिआ.

जब कंस को जब कोई उपाय नहीं सूझा तब उसने अक्रूर को बुला कर कहा कि नंदगांव जाकर कृष्ण और बलराम को मथुरा बुला लाओ.

प्रभु मथुरा आ पहुंचे जहां आने पर कंस ने अपने सबसे बलशाली पहलवान चाणुर और मुष्टिक के साथ प्रभु श्री कृष्णा के मल्ल युद्ध की घोषणा की.

अखाड़े के द्वार पर हीं कंस ने कुवलय नामक हाथी को रख छोड़ा था, ताकि वो कृष्‍ण को कुचल सके. लेकिन श्रीकृष्ण ने उस हाथी को भी मार डाला.

श्रीकृष्ण ने चाणुर के गले में अपना पैर फंसा कर युद्ध में उसे मार डाला और बलदेव ने मुष्टिक को मार गिराया. बलदेव ने मूसल और हल से और कृष्ण ने सुदर्शन चक्र से दैत्यों को माघ मास की शुक्ल पक्ष की सप्तमी को मार डाला.

उसके पश्चात श्री कृष्ण ने कहा- ‘हे दुष्ट कंस! आज मैं इसी स्थल पर तुम्हें मारकर इस पृथ्वी को तुम्हारे भार से मुक्त करूंगा’.

कंस उनकी ललकार सुन आ पंहुचा जहां श्री कृष्ण ने कंस के बालों को पकड़ा और घुमाकर पृथ्वी पर पटक दिया जिससे वह मार गया.

कंस के मरने पर देवताओं ने आकाश से कृष्ण और बलदेव पर पुष्प की वर्षा की. फिर कृष्ण ने माता देवकी और वसुदेव को कारागृह से मुक्त कराया और उग्रसेन को मथुरा की गद्दी सौंप दी.इस तरह भगवान् श्री कृष्णा ने दुष्टो का नाश करके मथुरा की धरती को पापमुक्त किया.

॥ बोलो बांके बिहारी लाल की जय ॥ ॥ बोलो भगवान श्रीकृष्ण की जय ॥ ॥राधे राधे ॥ ॥राधे राधे ॥॥राधे राधे ॥॥राधे राधे ॥॥राधे राधे ॥॥राधे राधे ॥॥राधे राधे ॥॥राधे राधे॥

About the author

adminhindu

View all posts

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *